top of page

भ्रम

Aug 10, 2025
1 min read

एक किस्सा खत्म है,


या फिर ये बस एक भ्रम है,


भ्रम ही है शायद


क्यूंकि था तो ये एक तरफा ही,


ये भी भ्रम ही था कि


था ये दो तरफा भी,


दो तरफा होता तो


कहानी यूँ अधूरी ना होती,


अंत में एक राजा एक रानी होती,


अब अधूरी कहानी है


और बचा एक ही किरदार है,


तो पन्ना ही पलट देते हैं


अब बचा न कोई कदरदान है,


वैसे भी एक तरफा कहानी की


यहां न कोई कीमत है,


राधा मीरा की बात नहीं यहाँ


कलयुग में सबकी अलग किस्मत है,


तो चलो स्वीकार ये भी


और कर भी क्या सकते हैं,


दिल का एक कोना,


और उस कोने का ये अध्याय


चलो अब बस यहीं खत्म करते है।

Recent Posts

See All
Azaadi ki goonj

सदियों की काली रातों में जब भारत माँ रोई थी, हर एक साँस गुलामी के तीखे ज़हर में खोई थी। माटी की छाती छलनी थी, हर आँख से आँसू बहते थे, अपने ही घर में सब बेबस, घुट-घुट कर ज़ुल्म को सहते थे। जलियाँवाला ब

 
 
 
क्या मैं पार्वती बन पाऊँगी?

एक द्वंद्व है मन के भीतर, एक मौन सा शोर उठता है, जब भी उसकी आँखों में, कोई गहरा सा वैराग्य दिखता है। मैं दुनिया की रस्मों में, उलझी हुई एक कोमल कली, वो शून्य के विस्तार सा, हर बंधन से है मुक्त—बली। मे

 
 
 
भक्ति प्रेम

काष्ठ की देह में बैठे प्रभु, पर हृदय आज भी धड़कता है। नीलाचल की खामोशी में, मेरा रोता मन सुनता है। तेरी आँखें गोल सही, पर दृष्टि अनंत है। तू देख लेता है वो भी… जो कहा नहीं जाता है। कलियुग ने तेरे नाम

 
 
 

Comments


  • Facebook
  • LinkedIn
  • Instagram

©2019 by Runjhun's Travel Diary. Proudly created with Wix.com

bottom of page